150 सवाल · मुफ़्त · बिना अकाउंट
लक्ष्मण रेखा — पहली डेट के सवाल
पहली डेट के लक्ष्मण रेखा पैक के सभी 150 सवाल, पूरे लिखे हुए। पढ़ना भी मुफ़्त, ब्राउज़र में खेलना भी।
दो लोगों का खेल, कि आप एक-दूसरे को कितना पहचानते हैं।
मुफ़्त खेलें1फ़ोन खुला छोड़कर उठना?
- बेझिझक छोड़ना
- स्क्रीन बंद करना
- साथ ले जाना
- कौन बैठा है उस पर
2साथी से अपनी जगह साझा?
- हमेशा चालू रखना
- सिर्फ़ रास्ते में
- पूछे तो बताना
- बिल्कुल नहीं
3दिन में कहाँ हो, यह पूछा जाए तो?
- परवाह लगना
- स्वाभाविक लगना
- घुटन लगना
- क्यों पूछा सोचना
4अकेला रहना हो तो कैसे कहना?
- खुलकर कहना
- बहाना बनाना
- चुपचाप दूर हो जाना
- बिना कहे जताना
5घर में दरवाज़ा बंद करो तो क्या चाहिए?
- कोई परेशान न करे
- कोई दस्तक दे
- कोई आकर पास बैठे
- दरवाज़ा बंद ही नहीं करना
6साथ रहने पर क्या पूरी तरह तुम्हारा?
- काम का कोना
- अपनी अलमारी
- सुबह का वक़्त
- सब साझा हो
7बिना पूछे सामान इस्तेमाल करने वाले से?
- कोई दिक़्क़त नहीं
- बस पूछ ले
- कुछ चीज़ें छोड़कर
- असहज होने की बात कहना
8खुला लैपटॉप कोई देख ले तो?
- परवाह न करना
- तुरंत बंद करना
- बेचैनी होना
- वैसे भी लॉक रहता है
9तुम्हारा पार्सल साथी खोल दे तो?
- कोई बात नहीं
- इंतज़ार करता तो अच्छा
- साथ में खोलें
- बुरा लगना
10फ़ोन का लॉक कैसे खुलता है?
- उँगली से
- चेहरे से
- पासवर्ड से
- लॉक ही नहीं
11साथी तुम्हारे फ़ोन में कुछ देखना चाहे तो?
- तुरंत देना
- पास खड़े रहना
- क्या देखना है पूछना
- अपने फ़ोन से देखे
12तुम्हारा अकाउंट किसके लिए खुला?
- सबके लिए
- फ़ॉलो करने वालों के लिए
- सिर्फ़ करीबियों के लिए
- अकाउंट ही नहीं
13साथी बिना पूछे दोनों की तस्वीर डाले तो?
- अच्छा लगना
- पहले पूछे तो अच्छा
- कौन-सी तस्वीर है देखना
- असहज लगना
14एक ही घर में अलग कमरों में वक़्त?
- बहुत अच्छा लगता है
- कभी-कभी ज़रूरी
- दूरी जैसा लगता है
- एक ही कमरे में रहें
15साथ होते हुए हेडफ़ोन लगाकर अपनी दुनिया?
- अक्सर
- कभी-कभी
- अजीब लगता है
- साथ हों तो नहीं
16परिवार को कैसे पता चलता है कि किससे मिलते हो?
- मैं बताना
- पूछें तो बताना
- खुद सुन लेते हैं
- पता ही नहीं चलता
17साथी के संदेश दोस्त को दिखाना?
- सब दिखाना
- मज़ेदार वाले
- सिर्फ़ दिक़्क़त होने पर
- बिल्कुल नहीं
18साथी से झगड़े की बात परिवार को?
- तुरंत बताना
- बात बीत जाने पर
- कभी नहीं
- मेरा पक्ष लें तो
19दोस्तों के ग्रुप में साथी भी?
- शामिल हो
- सिर्फ़ प्लान होने पर
- अलग रहे
- ऐसा ग्रुप नहीं
20किसका संदेश आया, यह बताना?
- खुद बता देना
- पूछें तो बताना
- टाल देना
- नहीं बताना
21साथी जिसे न जानता हो उस दोस्त से बिना बताए मिलना?
- बेझिझक मिलना
- बाद में बताना
- पहले बताना
- ऐसा दोस्त नहीं
22बड़ा ख़र्च साथी को बताना?
- ख़रीदने से पहले
- ख़रीदने के बाद
- पूछे तो
- मेरा पैसा मेरी बात
23साथी को न पता हो ऐसी कोई योजना?
- कोई दिक़्क़त नहीं
- थोड़ी खटक
- बहुत खटक
- ऐसी योजना नहीं
24दफ़्तर में रिश्ते की ख़बर किसे?
- सबको
- कुछ करीबियों को
- अफ़सर के अलावा सबको
- किसी को नहीं
25दोनों की बात किसी को न बताना मुश्किल?
- बिल्कुल नहीं
- एक को बता देना
- बहुत मुश्किल
- बताने का ख़याल ही नहीं
26साथी परिवार को तुम्हारे बारे में कैसे बताए?
- सब कुछ
- मोटे तौर पर
- कम और अच्छा
- मैं खुद बताना चाहूँ
27साझा दोस्त तुम्हारे बारे में कितना जानते हैं?
- सब कुछ
- अच्छे हिस्से
- लगभग कुछ नहीं
- बिना बताए भी समझ जाते हैं
28तस्वीरें दिखाते वक़्त आगे बढ़ने देना?
- देने देना
- मैं खुद बढ़ाना
- सिर्फ़ वही तस्वीर
- नहीं दिखाना
29घर में कोई जगह जहाँ साथी न टटोले?
- ऐसी कोई जगह नहीं
- एक दराज़
- एक अलमारी
- पूरा कमरा
30किसी का राज़ साथी को बताना?
- नहीं बताना
- नाम बिना बताना
- उसे भी पता हो
- हालात पर निर्भर
31साथी बिना बताए दरवाज़े पर आ जाए तो?
- बहुत अच्छा लगना
- हैरानी पर खुशी
- बिना तैयारी पसंद नहीं
- पहले बताने को कहना
32दोनों के लिए फ़ोन का कौन-सा नियम?
- खाने पर फ़ोन नहीं
- रात में फ़ोन नहीं
- साथ हों तो साइलेंट
- नियम की ज़रूरत नहीं
33एक-दूसरे का फ़ोन देखने पर क्या तय?
- दोनों न देखें
- दोनों बेझिझक देखें
- पूछकर देखें
- बात ही न करें
34साझा पैसा किस लिए?
- घर के ख़र्च
- छुट्टियाँ
- अचानक ज़रूरत
- साझा पैसा न हो
35फ़िल्म या संगीत का साझा अकाउंट?
- एक काफ़ी है
- अलग रहें
- पासवर्ड साझा करना
- सोचा नहीं
36कौन-से फ़ैसले बिना बताए नहीं?
- सब पर बात
- सिर्फ़ बड़े फ़ैसले
- पैसे वाले
- अपना-अपना
37परिवारों से कितनी बार मिलना, पहले तय हो?
- पहले तय हो
- अपने आप बैठ जाता है
- अपना परिवार अपना मामला
- बात की चीज़ नहीं
38दोस्तों के साथ अलग योजना पर साथी से?
- पहले बताना
- उसी दिन बताना
- बाद में बताना
- बताने की ज़रूरत नहीं
39साथी के सामने फ़ोन पर बात?
- कमरे से बाहर जाना
- वहीं बात करना
- स्पीकर पर रखना
- बाद में करना
40घर दोस्त बुलाने पर बताना ज़रूरी?
- हर बार
- भीड़ हो तो
- ज़रूरी नहीं
- पहले पूछना
41दोनों की योजनाएँ एक ही कैलेंडर में?
- बहुत अच्छा
- सिर्फ़ साझा योजनाएँ
- बेकार लगता है
- मेरा कैलेंडर मेरा
42साथी को घर की चाबी?
- तुरंत देना
- रिश्ता आगे बढ़ने पर
- साथ रहने पर
- नहीं देना
43सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को फ़ॉलो ज़रूरी?
- बिल्कुल
- फ़र्क़ नहीं
- न करें तो बेहतर
- इस्तेमाल ही नहीं करता
44साथ रहें तो कौन-सा नियम पहले?
- सफ़ाई
- मेहमान
- शांति के घंटे
- ख़र्च
45अलग-अलग छुट्टी पर जाना?
- बिल्कुल हो सकता है
- छोटी हो तो
- बिल्कुल नहीं
- आज़माना चाहूँगा
46साथी को सब बताना ज़रूरी लगता है?
- ज़रूरी लगता है
- बताने का मन होता है
- चुनकर बताना
- कोई ज़रूरी नहीं
47देर से जवाब देने पर सफ़ाई?
- हर बार
- लंबा हो तो
- पूछे तो
- सफ़ाई नहीं
48परिवार साथी से मिलना चाहे तो?
- तुरंत तय करना
- थोड़ा रुकना
- साथी से पूछना
- टाल देना
49हफ़्ते के आख़िर साथ बिताना ज़रूरी?
- हर हफ़्ते
- ज़्यादातर
- हर बार तय करना
- कोई वादा नहीं
50साथी के परिवार के खाने पर जाना?
- खुशी से जाना
- कभी-कभी जाना
- मजबूरी में जाना
- न जाना बेहतर
51साथी का मन उदास हो तो अपनी योजना?
- हमेशा रद्द करना
- ज़रूरी न हो तो रद्द
- अपने पास बुलाना
- योजना पर टिके रहना
52एक दिन बिल्कुल बात न हो तो?
- बिल्कुल सामान्य
- अच्छा ही लगता है
- उत्सुकता होना
- कुछ गड़बड़ लगना
53साथी के तोहफ़े का बदला ज़रूरी?
- ज़रूर देना
- मौक़ा आने पर
- ज़रूरी नहीं लगता
- तुरंत कुछ ख़रीदना
54साथी के दोस्त पसंद आने चाहिए?
- न भी आएँ तो निभाना
- पसंद करने की कोशिश
- ज़रूरी नहीं
- न पसंद हों तो कहना
55नापसंद योजना में शामिल होना पड़े तो?
- बिना कहे जाना
- पहले कह देना
- बीच में निकल जाना
- अपनी योजना बनाना
56परिवार दिन में ख़बर की उम्मीद रखता है?
- रोज़ बात होती है
- कुछ दिनों में
- कुछ हो तो
- कोई उम्मीद नहीं
57काम के बाद सीधे घर आना अपेक्षित?
- हर शाम जाना
- बताकर रुक जाना
- अपने मन से
- अपने घंटे खुद तय
58ख़बर पहले साथी को?
- पहले वही सुने
- जो सामने पड़े
- पहले परिवार को
- क्रम अहम नहीं
59साथी के लिए हुए कपड़े पहनना?
- बहुत खुशी से
- एक बार पहनना
- पसंद न हो तो नहीं
- साथ चुनने को कहना
60साथी का शौक़ भी आज़माना?
- तुरंत आज़माना
- एक बार आज़माना
- दिलचस्पी हो तो
- अपना शौक़ काफ़ी
61अपना अतीत कब बताना शुरू?
- पहली मुलाक़ात में
- कुछ मुलाक़ातों बाद
- गंभीर होने पर
- वे बताएँ तो
62कितने रिश्ते रहे, यह बताना?
- गिनती बताना
- अंदाज़ा बताना
- न पूछें तो बेहतर
- नहीं बताना
63पुराने साथी का नाम लेना?
- बेझिझक लेना
- नाम नहीं लेना
- बात आए तो लेना
- ज़िक्र ही नहीं
64परिवार से न कही बात साथी को?
- उन्हें बताना
- कुछ हिस्सा बताना
- किसी को नहीं
- पहले परिवार को
65शर्मिंदगी वाला क़िस्सा कब?
- पहले मौक़े पर
- नज़दीकी बढ़ने पर
- मज़ाक़ बनाकर
- कभी नहीं
66कितना कमाते हो, बताना?
- रक़म बताना
- अंदाज़ा बताना
- गुज़ारा हो जाता है कहना
- बात नहीं करना
67अतीत किसे बेहतर पता, परिवार को या साथी को?
- परिवार को
- साथी को
- दोनों को आधा
- किसी को नहीं
68बिना पूछे कुछ बताना?
- खुद छेड़ना
- सही वक़्त का इंतज़ार
- बिना पूछे नहीं
- कभी नहीं
69सबसे कठिन दौर साथी को बताना?
- पूरा बताना
- छोटा करके बताना
- बहुत बाद में
- अपने पास रखना
70बचपन और जवानी की तस्वीरें?
- सब दिखाना
- कुछ दिखाना
- शर्म से नहीं दिखाना
- मेरे पास हैं ही नहीं
71पहली मुलाक़ात में अतीत पूछा जाए तो?
- खुलकर बताना
- छोटा जवाब
- मज़ाक़ में उड़ाना
- मैं भी पूछना
72बताने के बाद नज़र बदलने का डर?
- बिल्कुल नहीं
- थोड़ा-सा
- बहुत
- इसीलिए नहीं बताना
73साथी को न पता हो ऐसी आदत?
- खुद बताना
- पता चलने का इंतज़ार
- छोड़ने की कोशिश
- छिपाते रहना
74जिस पर बात नहीं करनी वह विषय आए तो?
- बात नहीं करनी कहना
- विषय बदलना
- छोटा जवाब देना
- बता देना और ख़त्म
75साथी अतीत न बताना चाहे तो?
- स्वाभाविक लगना
- उत्सुकता होना
- मैं भी न बताना
- वक़्त पर बता देगा
76कोई सवाल पूछने में झिझक हो तो?
- फिर भी पूछना
- इजाज़त लेकर पूछना
- घुमाकर पूछना
- नहीं पूछना
77नया मिला इंसान बहुत निजी बात कहे तो?
- मैं भी कहना
- सिर्फ़ सुनना
- बात हल्की करना
- क्यों बता रहे हैं पूछना
78दोनों में से कोई विषय न छेड़े तो?
- मैं छेड़ना
- इंतज़ार करना
- वजह पूछना
- मैं भी न छेड़ना
79कौन-सी बात सिर्फ़ पूछने पर?
- परिवार की
- कमाई की
- पुराने रिश्तों की
- बिना पूछे भी बताना
80कोई कहे किसी को मत बताना, तो?
- वादा करना
- पहले वजह पूछना
- बिना वादा सुनना
- अनसुना कर देना
81दो लोगों के बीच कोई अनकहा विषय हो?
- नहीं होना चाहिए
- कुछ होने चाहिए
- हर किसी का अपना विषय
- वक़्त के साथ साफ़
82सामने वाले की हद कहाँ से पता?
- आवाज़ से
- छोटे जवाबों से
- विषय बदलने से
- पता नहीं चलता
83कौन-सा सवाल ज़्यादा लगता है?
- कितना कमाता हूँ
- अकेला क्यों हूँ
- परिवार से रिश्ता
- कोई ज़्यादा नहीं
84बात शुरू करके पछतावा हो तो?
- बीच में रोकना
- आख़िर तक जाना
- हल्का करके ख़त्म करना
- कुछ शुरू ही न किया जैसा
85अपने बारे में बताते हुए आख़िर में क्या?
- मुश्किल दौर
- अपनी ग़लतियाँ
- अपनी उम्मीदें
- कुछ नहीं बचाना
86सामने वाले के सवालों का उतना ही गहरा जवाब?
- उतना ही गहरा
- और खुलकर
- और बंद होकर
- विषय पर निर्भर
87सामने वाला तुमसे जल्दी खुले तो?
- मैं भी तेज़ होना
- अपनी रफ़्तार रखना
- धीमा होने को कहना
- अच्छा लगना
88पहली मुलाक़ात में कितने सवाल ठीक?
- जितने हों उतने
- नपे-तुले
- सवाल कम, बात ज़्यादा
- गिनती नहीं
89सामने वाला अपनों को तुम्हारे बारे में कब बताए?
- तुरंत
- कुछ मुलाक़ातों बाद
- मुझे पता हो तब
- उसकी मर्ज़ी
90दोनों के बीच की नज़दीकी को नाम कब?
- तुरंत नाम मिले
- अपने आप साफ़ हो
- कोई पूछे तब
- नाम की ज़रूरत नहीं
91नापसंद बात कहने की जगह मन में रखना?
- हमेशा कहना
- ज़रूरी हो तो कहना
- ज़्यादातर रखना
- बाद में कहना
92मुलाक़ात के बाद दोस्तों को कितना पता?
- एक-एक बात
- कैसा रहा बस
- बस यह कि गया था
- कुछ नहीं
93सामने वाले को न पता चले ऐसी बात?
- खुद बताना
- पूछे बिना चुप
- वक़्त के साथ बताना
- कभी नहीं बताना
94सामने वाले को सब पूछने का हक़?
- सब पूछ सकता है
- ज़्यादातर पूछ सकता है
- सिर्फ़ अपने से जुड़ा
- ऐसा हक़ नहीं
95सामने वाले से न कही छोटी बातें?
- बिल्कुल नहीं
- कुछ हैं
- गिनी नहीं जा सकतीं
- वक़्त के साथ कम
96कुछ न कहने से बाद में दिक़्क़त हुई?
- कभी नहीं
- एक बार हुई
- अक्सर होती है
- वक़्त आने पर होगी
97दोनों के बीच की बात कौन जान सकता है?
- कोई नहीं
- सबसे करीबी दोस्त
- परिवार
- जो पूछे वह
98लगे कि सामने वाला कुछ छिपा रहा है तो?
- पूछना
- विषय छेड़ना पर न पूछना
- खुद बताने तक रुकना
- ध्यान न देना
99जो बात बीच में रहे, वह कैसे कहना?
- पहले शर्त रखना
- कहने के बाद कहना
- शर्त नहीं रखना
- ऐसी बात नहीं कहना
100तुम्हारे बारे में सामने वाला किसी और से सुने?
- बिल्कुल नहीं चाहना
- छोटी बात हो तो ठीक
- फ़र्क़ नहीं
- वैसे भी सब जानते हैं
101अच्छी ख़बर कब देना?
- तुरंत
- पक्का होने पर
- मिलने पर
- वक़्त आने पर
102जो ठीक नहीं चल रहा, उसे छिपाना?
- तुरंत बताना
- सुलझाकर बताना
- पूछे तो बताना
- अंदर रखना
103कुछ कहने से पहले मन में तैयारी?
- शब्द-दर-शब्द
- मोटे तौर पर
- बिल्कुल नहीं
- तैयारी में ही रह जाना
104जो विषय नहीं सुनना, वह पहले बताना?
- पहले बताना
- विषय आने पर बताना
- जताना पर न कहना
- कभी नहीं कहना
105अपने बारे में ग़लत बात फैले तो?
- तुरंत सुधारना
- मौक़ा मिलने पर
- ज़रूरी हो तो
- कुछ नहीं करना
106दो लोगों के बीच नियम कैसे बनते हैं?
- बात करके
- अपने आप
- एक तय करता है
- बनते ही नहीं
107बिना बात किए नियम निभाना?
- बिल्कुल हो सकता है
- बात ज़रूरी है
- टूटने पर बात होती है
- मैं ऐसे ही करता हूँ
108सामने वाला वादा भूल जाए तो?
- याद दिलाना
- ज़िक्र न करना
- अगली बार का इंतज़ार
- मैं भी भूल जाना
109दोनों की राय न मिले तो?
- जिसे ज़्यादा चाहिए वह जीते
- बारी-बारी
- बीच का रास्ता
- दोनों छोड़ देना
110जोड़े को नियम कब बनाने चाहिए?
- पहले दिन से
- पहली दिक़्क़त पर
- बहुत बाद में
- नियम पसंद नहीं
111वादा न निभा पाओ तो कब बताना?
- समझते ही
- आख़िरी पल पर
- बाद में समझाना
- फिर भी जाना
112सामने वाला तुम्हारा नियम तोड़े तो?
- तुरंत कहना
- एक बार जाने देना
- मैं भी वही करना
- वजह पूछना
113दोनों के बीच कौन-सा नियम ज़रूरी?
- ख़बर करना
- वादा निभाना
- अपने लिए वक़्त रखना
- कोई ज़रूरी नहीं
114कौन ज़्यादा लिखता है, ध्यान जाता है?
- बिल्कुल नहीं
- पता चल जाता है
- बराबर करने की कोशिश
- गिन भी लेना
115मुलाक़ात कितनी पहले तय?
- उसी दिन
- एक दिन पहले
- हफ़्ते की शुरुआत में
- कोई तय दिन हो
116देर रात का संदेश ठीक है?
- हर वक़्त ठीक
- एक वक़्त के बाद नहीं
- ज़रूरी हो तो ठीक
- नींद न टूटे तो ठीक
117साझा योजना रद्द हो तो नई कौन बनाए?
- जिसने रद्द की
- दूसरा
- दोनों मिलकर
- कोई नहीं
118सामने वाला तुमसे क्या चाहता है, कैसे पता?
- वह बता देता है
- हालत से पता चलता है
- पूछ लेना
- पता नहीं चलता
119सामने वाले के लिए आदत बदलना?
- छोटी आदतें बदलना
- कहे तो बदलना
- कुछ वक़्त आज़माना
- नहीं बदलना
120अपना ही बनाया नियम तोड़ो तो?
- खुद को माफ़ करना
- सामने वाले को बताना
- नियम पर दोबारा सोचना
- दोबारा न करना
121जिस बुलावे पर जाना न हो?
- सीधे मना करना
- बहाना बनाना
- फिर भी जाना
- जवाब टालना
122मना करते वक़्त वजह ज़रूरी?
- हमेशा बताना
- छोटी वजह काफ़ी
- वजह नहीं बतानी
- वजह हो तो बताना
123सामने वाला नापसंद चीज़ का प्रस्ताव दे तो?
- फिर भी आज़माना
- नापसंद बताना
- कुछ और सुझाना
- बारी-बारी करने को कहना
124बिना पूछे हुए फ़ैसले पर?
- मान लेना
- वजह जानना चाहना
- एतराज़ करना
- अपनी राह चलना
125बिल सामने वाला दे तो?
- सहज लगना
- क़र्ज़ जैसा लगना
- अगली बार मेरा कहना
- मना कर देना
126मन न होते हुए कितनी बार हाँ?
- कभी नहीं
- कुछ बार
- गिनती नहीं
- हमेशा हाँ
127एक तेज़ और एक धीमा हो तो कौन ढले?
- तेज़ वाला रुके
- धीमा क़दम बढ़ाए
- दोनों थोड़ा-थोड़ा
- कोई नहीं बदलता
128नापसंद तोहफ़े पर प्रतिक्रिया?
- पसंद आने का बहाना
- सच बताना
- मज़ाक़ में बदलना
- बदलवाने को कहना
129वादा करके मन बदल जाए तो?
- वादा निभाना
- तुरंत बताना
- टालने की कोशिश
- समझाकर मना करना
130सामने वाला कुछ माँगे तो कैसे?
- सीधे माँगे
- इशारे से कहे
- वजह भी बताए
- जैसे चाहे
131मजबूरी में किसी जगह जाकर?
- फिर भी मज़ा आना
- मन उखड़ जाना
- जताना नहीं
- जल्दी निकल जाना
132मना करने के बाद क्या?
- राहत
- अपराधबोध
- कुछ नहीं
- सफ़ाई देने का मन
133सामने वाले को दुख न हो, इसके लिए कहाँ तक?
- ज़रूरत हो तो आख़िर तक
- एक हद तक
- शुरू में ही सच कहना
- कोशिश नहीं करना
134भारी लगने वाली गुज़ारिश?
- मना करना
- एक बार कर देना
- करना पर कुड़कुड़ाना
- मना कर ही नहीं पाना
135एक बार मना करने के बाद दोबारा बुलावा?
- ज़रूर बुलाए
- एक बार और बुलाए
- न बुलाए
- मैं बुलाना
136तुम्हें खुलकर कहने के लिए क्या चाहिए?
- सामने वाले का खुलना
- लंबी चुप्पी
- सीधा सवाल
- कुछ नहीं
137मन की बात कहकर क्या होता है?
- हल्का लगना
- पछतावा होना
- ताक़त मिलना
- कुछ नहीं
138खुलकर कहने की हद कहाँ?
- जहाँ शर्म आए
- जहाँ दूसरे को दुख हो
- जहाँ तीसरा जुड़ा हो
- कोई हद नहीं
139कहने के बाद बात कौन बंद करे?
- मैं तुरंत बंद करना
- बात जारी रखना
- सामने वाले पर छोड़ना
- वहाँ से हट जाना
140अपनी ग़लती कब मानना?
- तुरंत
- पकड़े जाने से पहले
- पूछे जाने पर
- खुल जाने पर
141मन बदल गया, यह कहना मुश्किल?
- आसानी से कहना
- थोड़ी मुश्किल
- बहुत मुश्किल
- कभी नहीं कहना
142खुलकर कहते हुए क्या छोड़ देना?
- वजह
- कौन था
- सबसे अहम हिस्सा
- कुछ नहीं छोड़ना
143कह देने के बाद सामने वाले से क्या उम्मीद?
- वह भी कहे
- बस सुने
- कुछ कहे
- कोई उम्मीद नहीं
144कोई तुमसे मन की बात कहे तो?
- नज़दीकी बढ़ना
- ज़िम्मेदारी लगना
- बेचैनी होना
- फ़र्क़ न पड़ना
145मन की बात किस मुलाक़ात में?
- पहली में
- तीसरी में
- महीनों बाद
- कभी नहीं
146कही बात को हल्के में लिया जाए तो?
- ध्यान न देना
- गंभीरता से लेने को कहना
- दोबारा न कहना
- मैं भी मज़ाक़ बनाना
147कहते-कहते रुक जाना हुआ है?
- कई बार
- एक-दो बार
- कभी नहीं
- सोचा पर कह दिया
148कही बात वहीं रहेगी, भरोसा?
- पूरा भरोसा
- वक़्त के साथ भरोसा
- भरोसा नहीं पर कहना
- नहीं कहना
149सामने वाला कितना खुले?
- सब कहे
- जितना सहज लगे
- थोड़ा ही कहे
- कुछ न कहे
150कहकर बताना या करके दिखाना?
- हमेशा कहना
- हमेशा करके दिखाना
- हालात पर निर्भर
- दोनों नहीं आता