150 सवाल · मुफ़्त · बिना अकाउंट
सामाजिक दायरा — पहली डेट के सवाल
पहली डेट के सामाजिक दायरा पैक के सभी 150 सवाल, पूरे लिखे हुए। पढ़ना भी मुफ़्त, ब्राउज़र में खेलना भी।
दो लोगों का खेल, कि आप एक-दूसरे को कितना पहचानते हैं।
मुफ़्त खेलें1परिवार से आख़िरी मुलाक़ात कब?
- इसी हफ़्ते
- इसी महीने
- महीनों हो गए
- साथ ही रहते हैं
2परिवार से बात कैसे होती है?
- वीडियो कॉल पर
- फ़ोन पर
- मैसेज पर
- बिना बताए पहुँचकर
3परिवार से कितनी समानता?
- बहुत ज़्यादा
- कुछ बातों में
- बिल्कुल नहीं
- एकदम उलट
4परिवार साथी से पहली बार मिले तो?
- तुरंत अपना लेना
- सवालों की झड़ी
- दूरी बनाए रखना
- बाद में राय देना
5परिवार रिश्ते पर उल्टा कहे तो?
- गंभीरता से लेना
- अपनी राह चलना
- बहस करना
- अनसुना करना
6परिवार से खटपट हो तो पहला क़दम कौन?
- मैं
- वे
- कोई नहीं
- वक़्त के साथ ठीक
7परिवार में कोई अनकहा विषय?
- ज़्यादातर बातें अनकही
- एक नाज़ुक विषय
- सब बातें होती हैं
- वक़्त के साथ कम हुआ
8परिवार के साथ रहना कैसा?
- लंबे समय तक ठीक
- थोड़े वक़्त के लिए
- पास पर अलग
- बिल्कुल नहीं
9बड़े पारिवारिक जमावड़े कैसे लगते हैं?
- बेसब्री से इंतज़ार
- मज़ेदार पर थकाऊ
- फ़र्ज़ जैसा
- हो सके तो न जाना
10फ़ैसला परिवार को कब बताया जाता है?
- तय करने से पहले
- तय करने के बाद
- सिर्फ़ बड़े फ़ैसले
- कभी नहीं
11परिवार को फ़ोन कौन करता है?
- हमेशा मैं
- हमेशा वे
- बारी-बारी
- मैसेज ज़्यादा
12साथी के परिवार से कैसा रिश्ता चाहिए?
- अक्सर मिलने वाला
- गर्मजोशी पर दूरी वाला
- साल में कुछ बार
- अपने परिवार जैसा
13परिवार के सामने साथी से कैसा बर्ताव?
- हमेशा जैसा
- थोड़ी दूरी वाला
- ज़्यादा ख़याल वाला
- कुछ न जताने वाला
14तुम्हें सबसे अच्छा कौन जानता है?
- परिवार
- करीबी दोस्त
- साथी
- मेरे सिवा कोई नहीं
15परिवार से दूर शहर में रहना कैसा?
- आराम है
- याद आती है पर चले जाना
- पास रहना अच्छा
- पहले से दूर हूँ
16किसी के घर जाते वक़्त क्या साथ?
- खाने की कोई चीज़
- छोटा तोहफ़ा
- फूल
- कुछ नहीं
17मेहमान बुलाने से पहले क्या?
- पूरा घर समेटना
- कुछ पकाना
- बस एक नज़र डालना
- कोई तैयारी नहीं
18बिना बताए मेहमान आ जाए तो?
- खुशी होना
- हैरानी पर स्वागत
- असहज लगना
- दरवाज़ा न खोलना
19किसी के घर उसके नियम कितने?
- पूरी तरह मानना
- पहले पूछना
- मेज़बान को देखकर
- अपनी सहूलियत देखना
20किसी के घर कितनी देर?
- एक घंटा काफ़ी
- कुछ घंटे
- आधी रात तक
- मेज़बान तय करे
21कोई घर पर रुक जाए तो?
- दरवाज़ा सबके लिए खुला
- सिर्फ़ करीबी लोगों के लिए
- कुछ दिन तक ठीक
- बिल्कुल पसंद नहीं
22मेहमान जाने के बाद क्या?
- तुरंत समेटना
- सुबह पर छोड़ना
- लेटकर सुस्ताना
- हुई बातें सोचना
23मेहमान रसोई में आ जाए तो?
- आने देना
- मदद माँगना
- असहज लगना
- मना कर देना
24पड़ोसी के साथ एक मेज़ पर खाना?
- अक्सर होता है
- ख़ास मौक़े पर
- कभी नहीं
- अपने घर बुलाना
25मेज़बानी करने वाले को बाद में शुक्रिया?
- उसी रात लिखना
- अगले दिन फ़ोन
- मौक़े पर कह देना काफ़ी
- ख़याल नहीं आता
26पड़ोसी के घर जाना होता है?
- अक्सर
- एक-दो बार
- कभी नहीं
- वे हमारे यहाँ आते हैं
27साथी के घर पहली बार जाने पर?
- हर कोना देखना
- कुछ न छूना
- कुछ साथ ले जाना
- अपने घर जैसा सहज
28मेहमानों के बीच फ़ोन देखना?
- बिल्कुल नहीं
- कभी-कभार
- हमेशा हाथ में
- साइलेंट कर देना
29मेहमानी में सबसे ज़्यादा किसका ध्यान?
- दस्तरख़्वान का
- घर की सफ़ाई का
- बातचीत का
- किसी के ऊब न जाने का
30अपने मोहल्ले के लोगों से कितनी नज़दीकी?
- परिवार जैसी
- जान-पहचान पर दूरी
- अजनबी जैसा
- हाल में ही आना हुआ
31दोस्तों के बीच तुम्हारी भूमिका?
- योजना बनाना
- हँसाना
- सुनना
- बाद में शामिल होना
32करीबी दोस्त कितने?
- एक
- दो-तीन
- बड़ा गिरोह
- गिनती नहीं
33सबसे पुरानी दोस्ती कब से?
- बचपन से
- स्कूल के दिनों से
- पिछले कुछ सालों से
- सब नई हैं
34दोस्तों के लिए कितनी दूर?
- दूसरे शहर तक
- शहर में कहीं भी
- पास हो तो
- वे आ जाएँ
35दोस्त का साथी पसंद न आए तो कहना?
- खुलकर कहना
- इशारे में कहना
- पूछे तो कहना
- दख़ल न देना
36नए दोस्तों के बीच घुलना कैसा?
- बहुत आसान
- वक़्त लगता है
- थका देता है
- कोशिश ही नहीं
37साथी के दोस्तों में शामिल होना?
- हर मौक़े पर
- कभी-कभी
- बुलाया जाए तो
- अपना दायरा काफ़ी
38दोस्ती में दूरी आ जाए तो?
- खुद फ़ोन करना
- इंतज़ार करना
- वजह पूछना
- मान लेना
39साझा दोस्त रिश्ते में क्या जोड़ता है?
- भरोसा देता है
- बंधन मज़बूत करता है
- बातें उलझाता है
- कुछ नहीं जोड़ता
40दोस्तों के साथ सबसे ज़्यादा क्या?
- खाना जमाना
- बाहर निकलना
- देर तक बातें
- सिर्फ़ मैसेज
41दोस्त और साथी के बीच तनाव कैसे सुलझे?
- बीच में पड़ना
- उन पर छोड़ देना
- अलग-अलग बात करना
- साथ न बिठाना
42दोस्तों को कितना फ़ोन?
- रोज़ बात
- हफ़्ते में एक बार
- याद आने पर
- हमेशा वे करते हैं
43पुराना दोस्त सालों बाद मिले तो?
- तुरंत बैठ जाना
- हालचाल पूछकर आगे
- मिलने का प्लान बनाना
- दूर से नमस्ते
44दोस्तों में झगड़ा हो तो?
- बीच-बचाव करना
- किसी का पक्ष लेना
- किनारे रहना
- वहाँ से निकल जाना
45साथी के करीबी दोस्त से कैसा रिश्ता?
- अपने दोस्त जैसा
- नमस्ते भर का
- दूरी वाला
- जान-पहचान की ज़रूरत नहीं
46परिवार तुम्हारी पोस्ट देख सकता है?
- सब देखते हैं
- कुछ देखते हैं
- कुछ नहीं
- अलग अकाउंट है
47परिवार का कोई पोस्ट पर टोके तो?
- हटा देना
- सफ़ाई देना
- ध्यान न देना
- उनसे छिपा देना
48परिवार को रिश्ते की ख़बर पोस्ट से मिलती है?
- पहले खुद बताना
- पोस्ट से पता चलना
- किसी और से सुनना
- पता ही नहीं चलता
49ऑनलाइन सबसे पहले किसकी पोस्ट?
- करीबी दोस्त की
- परिवार की
- साथी की
- किसी को नहीं खोजना
50करीबी को अनफ़ॉलो करना?
- बेझिझक करना
- सिर्फ़ म्यूट करना
- दिल नहीं मानता
- वैसे भी फ़ॉलो नहीं
51साथ वाली तस्वीर डालने से पहले?
- सीधे डाल देना
- साथ वाले से पूछना
- चेहरे न दिखाना
- कभी नहीं डालना
52परिवार टैग करे तो कैसा लगता है?
- अच्छा लगता है
- शर्म आती है
- हटाने को कहना
- पता ही नहीं चलता
53करीबियों की पोस्ट देखने से क्या?
- जुड़ाव लगता है
- उत्सुकता बढ़ती है
- थकान होती है
- कुछ नहीं होता
54प्रोफ़ाइल पर परिवार दिखता है?
- कई तस्वीरों में
- कुछ तस्वीरों में
- बिल्कुल नहीं
- प्रोफ़ाइल बंद है
55पुरानी तस्वीरें करीबियों के साथ?
- अक्सर डालना
- सिर्फ़ उन्हें भेजना
- अपने पास रखना
- तस्वीरें जमा नहीं करना
56करीबियों की ख़बर कहाँ से?
- उनकी पोस्ट से
- वे खुद बताते हैं
- साझा जान-पहचान से
- मिलने पर पता चलता है
57परिवार का साझा ग्रुप है?
- है और चलता रहता है
- है पर सुनसान
- अलग-अलग बात होती है
- कोई ग्रुप नहीं
58साथी के घरवालों को ऑनलाइन फ़ॉलो?
- सबको करना
- सिर्फ़ मिले हुओं को
- वे करें तो करना
- किसी को नहीं
59पोस्ट कौन देखता है, यह जाँचना?
- सूची नियम से देखना
- कभी-कभी देखना
- कभी नहीं
- वैसे भी सबके लिए खुली
60एक दिन ऑनलाइन न दिखो तो करीबी क्या करेंगे?
- तुरंत पूछेंगे
- ध्यान ही नहीं देंगे
- मैसेज छोड़ेंगे
- वैसे भी कम आना होता है
61परिवार के जमावड़े में साथी को ले जाना?
- पहले मौक़े पर
- रिश्ता गंभीर होने पर
- भीड़ कम हो तो
- कभी नहीं
62दावत में कब पहुँचना?
- ठीक समय पर
- थोड़ी देर से
- जल्दी पहुँचना
- सबसे आख़िर में
63अपनों की दावत में तुम क्या?
- खाना सँभालना
- बातचीत सँभालना
- किनारे बैठना
- बच्चों के साथ खेलना
64जिस दावत का मन न हो, साथी जाना चाहे तो?
- साथ जाना
- थोड़ी देर जाना
- अकेले भेजना
- मनाने की कोशिश
65जश्न का तोहफ़ा कैसे चुनना?
- बहुत सोच-विचार
- उसी दिन ख़रीदना
- पसंद पूछ लेना
- सबके लिए एक जैसा
66मुलाक़ात में कितने लोग सही?
- दो
- चार-पाँच
- दस के आसपास
- जितने ज़्यादा उतना अच्छा
67साथी के परिवार से पहली मुलाक़ात में?
- खूब सवाल करना
- ज़्यादा सुनना
- मदद करना
- चुपचाप बैठना
68मिलन का सबसे अच्छा हिस्सा?
- पुराने दोस्तों से मिलना
- नए लोगों से परिचय
- लंबी बातें
- दस्तरख़्वान ही
69अपनों की ख़ास तारीख़ें कैसे याद?
- ज़बानी याद
- कैलेंडर में लिखना
- ऐप याद दिलाता है
- अक्सर भूल जाना
70परिवार और दोस्तों को एक साथ?
- अक्सर होता है
- ख़ास दिनों पर
- अलग रखना
- कभी नहीं किया
71पारिवारिक जमावड़े में सवालों की बौछार हो तो?
- मज़े से जवाब देना
- छोटा जवाब देना
- बात बदल देना
- वहाँ से हट जाना
72जिस मुलाक़ात में न बुलाया गया, उसका पता चले तो?
- बुरा लगना
- उत्सुकता होना
- राहत मिलना
- कुछ न सोचना
73साथी तुम्हारे दोस्तों से मिले तो तुम?
- साथ ही रहना
- उन्हें अकेला छोड़ना
- साझा विषय छेड़ना
- सबको पहले तैयार करना
74दावत में किसके साथ सबसे ज़्यादा?
- जिसे जानता हूँ उसके साथ
- नए मिले लोगों के साथ
- मेज़बान के साथ
- भीड़ में घूमते रहना
75साथी के साथ दावत में कौन ज़्यादा बोलता है?
- मैं
- वे
- बारी-बारी
- दोनों चुप
76सहकर्मियों को निजी ज़िंदगी कितनी?
- सब बताना
- मोटे तौर पर
- सिर्फ़ एक को
- कुछ नहीं
77काम घर तक आता है?
- हर शाम
- व्यस्त दिनों में
- कभी-कभार
- दरवाज़े पर छोड़ना
78घर आकर काम की बात कितनी?
- खूब बताना
- छोटा-सा सार
- पूछा जाए तो
- कुछ नहीं
79दोस्तों की मुलाक़ात कौन तय करता है?
- हमेशा मैं
- बारी-बारी
- हमेशा एक ही
- अपने आप हो जाता है
80काम की व्यस्तता रिश्ते पर?
- कोई असर नहीं
- मिलना कम होना
- मैसेज बढ़ जाना
- मेरा चुप हो जाना
81काम के घंटे मेल न खाएँ तो?
- अपनी दिनचर्या बदलना
- अपनी दिनचर्या बचाना
- बीच में मिलना
- मुश्किल होना
82दफ़्तर में कोई पसंद आए तो?
- खुलकर कहना
- इशारे का इंतज़ार
- काम में न मिलाना
- नौकरी छोड़ने पर पूछना
83एक ही दफ़्तर का जोड़ा चलता है?
- बिल्कुल चलता है
- निभाना मुश्किल
- अलग विभाग हो तो
- मेरे लिए नहीं
84दफ़्तर में रिश्ते की ख़बर?
- शुरू से बताना
- कुछ दिन छिपाना
- सिर्फ़ करीबियों को
- कभी नहीं
85साथी के सहकर्मियों से मिलना?
- जल्द से जल्द
- वक़्त आने पर
- मौक़ा मिले तो
- ज़रूरत नहीं
86दफ़्तर में सबसे बनाकर रखना कितना ज़रूरी?
- बहुत ज़रूरी
- एक हद तक
- फ़र्क़ नहीं
- कुछ लोग काफ़ी
87काम से मन उखड़े तो पहले किसे?
- साथी को
- करीबी दोस्त को
- सहकर्मी को
- किसी को नहीं
88छुट्टी के दिन दफ़्तर का फ़ोन आए तो?
- तुरंत उठाना
- देखकर तय करना
- बाद में करना
- बिल्कुल नहीं उठाना
89अपना मोहल्ला कितना जाना-पहचाना?
- सबको जानना
- दुकानदारों को जानना
- कुछ पड़ोसियों को
- किसी को नहीं
90अपने ही पेशे वाले से रिश्ता कैसा?
- बहुत निभता है
- बात काम पर लौट आती है
- मुक़ाबला शुरू होता है
- फ़र्क़ नहीं
91अपनी इमारत के पड़ोसी जानते हो?
- सबको
- कुछ को
- सिर्फ़ चेहरे से
- किसी को नहीं
92सीढ़ी पर पड़ोसी मिले तो?
- बात छेड़ना
- छोटा-सा नमस्ते
- सिर हिलाना
- तेज़ी से निकल जाना
93पड़ोसी दरवाज़ा खटखटाए तो पहला ख़याल?
- खुशी
- उत्सुकता
- असहजता
- कोई दिक़्क़त होगी
94पड़ोसी से कुछ माँगना?
- बेझिझक माँगना
- बहुत ज़रूरत पर
- झिझक होना
- कभी नहीं
95ऊपर से लगातार शोर आए तो?
- जाकर कहना
- पर्चा छोड़ना
- बर्दाश्त करना
- प्रबंधन को बताना
96नई इमारत में पहल कौन करे?
- दरवाज़े-दरवाज़े मिलना
- मिलने पर परिचय
- वे आएँ
- ज़रूरत नहीं
97पड़ोसी तुम्हें कितना जानें?
- सब जानें
- नमस्ते भर
- नाम भी न जानें
- सोचा नहीं
98पड़ोसी निजी बातें जानें तो?
- कोई दिक़्क़त नहीं
- कौन है उस पर
- बहुत खटकता है
- वैसे भी नहीं जानते
99पड़ोसियों के साझा ग्रुप पर राय?
- बहुत काम का
- म्यूट पर रखना
- बेकार लगता है
- शामिल ही नहीं होना
100घर पर भीड़ वाली शाम में पड़ोसी का ख़याल?
- पहले बता देना
- आवाज़ धीमी रखना
- जल्दी ख़त्म करना
- ख़याल नहीं आता
101पड़ोसी की ग़ैरहाज़िरी में घर का ध्यान?
- खुशी से रखना
- कहे तो रखना
- घबराहट होना
- नहीं रखना
102पड़ोस का मतलब क्या?
- सुरक्षित माहौल
- कभी-कभार मदद
- सिर्फ़ नमस्ते
- कुछ भी नहीं
103पड़ोसी से झगड़ा हो तो?
- आमने-सामने बात
- कुछ दिन रुकना
- अनदेखा करना
- बीच में किसी को लाना
104साथी का परिचय पड़ोसियों से?
- पहले मौक़े पर
- मिल जाएँ तो
- रिश्ता गंभीर होने पर
- ज़रूरत नहीं
105पड़ोसी को घर की चाबी?
- बेझिझक देना
- सिर्फ़ एक को
- मजबूरी में
- कभी नहीं
106सहकर्मियों के साथ रात का खाना?
- हर बुलावे पर
- कभी-कभी
- मजबूरी में
- कभी नहीं
107टीम में कौन-सी भूमिका?
- योजना बनाना
- काम करना
- माहौल हल्का करना
- चुप रहना
108टीम में किसी से न बने तो?
- सीधे बात करना
- दूरी बनाना
- काम अलग रखना
- किसी और से कहना
109सहकर्मी अपना काम टाल दे तो?
- चुपचाप कर देना
- एक बार जाने देना
- साफ़ मना करना
- ऊपर बताना
110साझा काम में सबसे ज़रूरी क्या?
- सबका बराबर काम
- वक़्त पर पूरा होना
- माहौल अच्छा रहना
- अपना हिस्सा पूरा करना
111टीम की बैठक में कितना बोलना?
- सबसे ज़्यादा
- नपा-तुला
- पूछे जाने पर
- कुछ नहीं
112अकेले काम या टीम के साथ?
- अकेले
- टीम के साथ
- दो लोगों में
- काम पर निर्भर
113टीम की कामयाबी में अपना हिस्सा बताना?
- खुलकर कहना
- नज़र आने का इंतज़ार
- टीम के नाम करना
- कुछ न कहना
114सहकर्मियों के जन्मदिन याद?
- सबके
- करीबियों के
- याद दिलाने पर
- बिल्कुल नहीं
115टीम की सैर पर साथी को?
- ज़रूर ले जाना
- बुलावा हो तो
- नहीं ले जाना
- सोचा ही नहीं
116टीम में ग़लती हो तो ज़िम्मेदारी?
- तुरंत लेना
- अपने हिस्से की
- चुपचाप सुधारना
- कोई न पूछे तो चुप
117नई टीम में पहला क़दम?
- सबसे मिलना
- कुछ दिन देखना
- काम में लग जाना
- एक शख़्स के क़रीब जाना
118सहकर्मी की निजी ज़िंदगी में दिलचस्पी?
- बहुत उत्सुकता
- बताएँ तो सुनना
- बिल्कुल नहीं
- अपनी बात बताना
119दफ़्तर के जश्न की तैयारी कौन?
- अक्सर मैं
- मदद को दौड़ना
- बस शामिल होना
- दूर रहना
120अपने अफ़सर से कैसा रिश्ता?
- दोस्ताना
- आदर के साथ दूरी
- सिर्फ़ काम की बात
- मुझे छोड़ दें
121रिश्ते की बात सोशल मीडिया पर?
- पहले दिन से
- गंभीर होने पर
- कभी-कभार इशारा
- कभी नहीं
122साथ की तस्वीर कौन डाले?
- दोनों
- सिर्फ़ मैं
- सिर्फ़ वे
- कोई न डाले
123प्रोफ़ाइल तस्वीर कितनी बार बदलती है?
- हर महीने
- साल में कुछ बार
- सालों से वही
- तस्वीर ही नहीं
124पसंद के इंसान की पुरानी पोस्ट?
- एकदम शुरू तक
- कुछ महीने पीछे तक
- बस एक नज़र
- बिल्कुल नहीं
125साथी तुम्हें फ़ॉलो न करे तो?
- कोई बात नहीं
- अजीब लगना
- वजह पूछना
- मैं भी न करना
126पोस्ट पर आई टिप्पणियों का जवाब?
- सबका
- कुछ का
- सिर्फ़ करीबियों का
- किसी का नहीं
127सामने वाला दूसरों की पोस्ट पसंद करे तो?
- कोई फ़र्क़ नहीं
- किसकी है उस पर
- बहुत खटकना
- कभी देखा ही नहीं
128ऑनलाइन दिखना बंद करना?
- हमेशा बंद
- मौक़े के हिसाब से
- हमेशा चालू
- सोचा नहीं
129जगह की पोस्ट में किसके साथ हो, यह बताना?
- खुलकर बताना
- सिर्फ़ जगह डालना
- कुछ न डालना
- फ़र्क़ नहीं
130पुराने परिचित की पोस्ट दिखे तो?
- टिप्पणी करना
- पसंद करना
- चुपचाप देखना
- आगे बढ़ जाना
131सोशल मीडिया पर कितने लोग?
- सब जान-पहचान वाले
- गिने-चुने लोग
- गिनती नहीं पता
- लगभग कोई नहीं
132पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया न आए तो?
- कुछ देर बाद हटाना
- परवाह न करना
- वजह सोचना
- वैसे भी नहीं देखना
133साथी से झगड़ा सोशल मीडिया पर?
- कभी नहीं
- इशारा करना
- एक गाना डालना
- खुलकर लिखना
134हफ़्ते भर सोशल मीडिया छोड़ने पर?
- राहत मिलना
- ऊब होना
- फ़र्क़ न पड़ना
- टिक न पाना
135नए मिले इंसान को तुरंत फ़ॉलो?
- उसी दिन
- कुछ दिन बाद
- वे करें तो
- कभी नहीं
136भीड़ भरी दावत में कैसा लगता है?
- जोश बढ़ना
- थोड़ी देर बाद थकना
- कोने में इंतज़ार
- जल्दी निकल जाना
137पार्टी के बुलावे पर पहला सवाल?
- कौन-कौन है
- कब ख़त्म होगी
- कहाँ है
- कोई सवाल नहीं
138दावत में अकेले या किसी के साथ?
- अकेले जाना
- कोई साथ चाहिए
- जान-पहचान हो तो अकेले
- न जाना चुनना
139दावत में अजनबी से बात कैसे शुरू?
- अपना परिचय देना
- साझा जान-पहचान से
- जगह की बात से
- वही शुरू करे
140दावत से कब निकलना?
- पहले मौक़े पर
- कुछ घंटों बाद
- सबसे आख़िर में
- थकान होने पर
141ऐन वक़्त के बुलावे पर?
- तुरंत जाना
- अपना कार्यक्रम देखना
- असहज लगना
- शालीनता से मना करना
142भीड़ में साथ वाला खो जाए तो?
- तुरंत फ़ोन करना
- एक जगह इंतज़ार
- अकेले घूमना
- बाहर निकलकर मिलना
143तय मुलाक़ात रद्द करनी हो तो?
- फ़ोन करना
- मैसेज भेजना
- साझा दोस्त से कहलवाना
- आख़िरी पल तक टालना
144जश्न की तैयारी कितनी पहले?
- कई दिन पहले
- उसी दिन
- आख़िरी आधे घंटे में
- तैयारी नहीं
145जन्मदिन कैसे बिताना?
- बड़ी पार्टी
- कुछ करीबी लोगों के साथ
- दो लोगों में
- बिना मनाए
146भीड़ में साथी का हाथ थामना?
- बेझिझक थामना
- जगह पर निर्भर
- शर्म आना
- पसंद नहीं
147दावत में माहौल फीका हो तो?
- माहौल जमाना
- चुपचाप इंतज़ार
- जल्दी निकलना
- फ़ोन देखना
148दोस्तों की महफ़िल में साथी कब?
- पहले हफ़्तों में
- कुछ महीनों बाद
- वही चाहे तो
- कभी नहीं
149साथी तुम्हारे बिना मिलने जाए तो?
- बिल्कुल सामान्य
- थोड़ी उत्सुकता
- मेरा भी मन
- असहज लगना
150भीड़ में सामने वाले का ध्यान भटके तो?
- सामान्य लगना
- बुरा लगना
- मेरा भी भटकना
- पता ही न चलना